संकल्प पत्र में छोटे किसानों, व्यापारियों को लुभाने का प्रयास

संकल्प पत्र में छोटे किसानों, व्यापारियों को लुभाने का प्रयास

संकल्प पत्र में छोटे किसानों, व्यापारियों को लुभाने का प्रयास

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्ता में लौटने पर किसानों-छोटे व्यापारियों के लिए पेंशन एवं आसान ऋण के साथ कई अन्य सुविधाएँ देने तथा पाँच साल में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या 10 प्रतिशत से कम पर लाने का वादा किया है और जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 एवं 35ए को समाप्त करने तथा राममंदिर निर्माण की प्रतिबद्धता दोहरायी है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यहाँ पार्टी मुख्यालय में अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ‘संकल्प पत्र’ नाम से पार्टी के चुनाव घोषणापत्र का लोकार्पण किया। इसमें किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को एक लाख रुपये तक का कर्ज पाँच साल के लिए बिना ब्याज के देने, उद्यमियों को बिना किसी सिक्योरिटी के 50 लाख रुपये तक का ऋण देने, किसानों और छोटे व्यापारियों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन की सुविधा, व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय व्यापार आयोग गठित करने, हर परिवार को पाँच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा देने तथा देश भर में 75 नये मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया गया है।

पार्टी ने राम मंदिर पर अपना पुराना रुख दोहराते हुये कहा है कि इसके निर्माण के लिए सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सभी विकल्प तलाशे जायेंगे। जम्मू-कश्मीर पर भी उसने अपना पुराना राग अलापते हुये कहा है कि एक बार फिर सत्ता में आने पर वह राज्य से संबंधित विशेष प्रावधानों – अनुच्छेद 370 और 35ए – को समाप्त करेगी। पार्टी ने समान नागरिक संहिता लाने तथा नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित कराने, आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रखने और देश की सुरक्षा से कोई समझाौता नहीं करने का संकल्प व्यक्त किया है।

सत्तारूढ़ दल ने अगले पाँच साल के दौरान बुनियादी ढाँचों के विकास पर 100 लाख करोड़ रुपये और ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर 25 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया है। उसने कहा है कि वर्ष 2024 तक एमबीबीएस और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या दोगुनी की जायेगी, डेढ़ लाख स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्रों में टेलीमेडिसिन तथा डायग्नोस्टिक लैब की सुवाधाएँ उपलब्ध करायी जायेंगी, हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज या परास्नातक मेडिकल कॉलेज खोले जायेंगे और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों का विश्व के शीर्ष 500 शैक्षणिक संस्थानों में स्थान सुनिश्चित किया जायेगा।

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