शहीद दिवस पर प्रसपा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

शहीद दिवस पर प्रसपा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

लखनऊ। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को डॉ राम मनोहर लोहिया की जयंती के मौके पर लोहिया ट्रस्ट व पार्टी कार्यालय में माल्यार्पण कर उनको नमन किया।
वही पार्टी कार्यालय में क्रान्तिकारी शहीद भगतसिंह, राजगुरू व सुखदेव को शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि दी !
आज प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी कार्यालय में लोहिया जयंती व शहीद दिवस पर माल्यार्पण कर नमन व श्रद्धांजलि दी!
इस मौके पर प्रसपा लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने लोहिया की जंयती पर डॉ लोहिया के विचारों की सीडी का विमोचन भी किया!
कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुऐ शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जिन सिद्धांतों पर समाजवाद रहा, उन सिद्धांतों पर लोहिया जी अडिग रहें, लोहिया जी हमारी विरासत हैं और हम उनके बताए रास्ते पर चल रहे हैं।
एक इतिहासकार, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी के रूप राममनोहर लोहिया के पास एक बहुआयामी परिप्रेक्ष्य था। उन्होंने अपने इस परिप्रेक्ष्य को समाज सुधार और राष्ट्र की उन्नति के संदर्भ में प्रस्तुत किया।

वे भारत की अखंडता के प्रति सजग और सतर्क थे लेकिन उन्होंने वैश्विक शांति और सहयोग की अपील भी की। वह एक ऐसा आधुनिक भारत चाहते थे जो धार्मिक अंधविश्वास और कट्टरपंथी सोच से दूर हो। उन्होंने परंपरागत व्यवहार के सबसे बदत्तर रूप जाति व्यवस्था को खिलाफ लोहिया ने लोगों को गोलबंद किया।
वहीं भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी जिन सिद्धांतों पर चल रही है उस से देश को खतरा भी है और देश कमजोर हो रहा है! इन्हें लोहिया के सिद्धांतों पर चलने वाले लोगों से प्रशिक्षण प्राप्त होता तो बहुत कुछ मदद मिल सकती थी! इसलिए हम कहते हैं कि लोहिया जी को पढ़ो समाजवाद को पढ़ो, पढ़ना भी चाहिए!आज भाजपा को समाजवाद से कोई लेना-देना नहीं है।देखा जायेगा तो लोकतंत्र में इतना झूठ बोलने वाली सरकार कभी नहीं रही।

शहीद दिवस पर श्री यादव ने कहा कि आज ही के दिन भगत सिंह, राजगुरु,सुखदेव को फांसी हुई थी!आजादी की लड़ाई बहुत लंबे समय तक चली!जितने भी क्रांतिकारी हुए सब समाजवाद वाले लोग थे! आज समाजवाद का फर्ज बहुत से लोग जानते भी नहीं उन्हें जानना चाहिए! लोहिया जी ने बहुत कुछ बताया है संघर्ष करना है, सत्ता परिवर्तन करना ह! जब किसी की हार हो जाती है तो फिर लोग निराश हो जाते हैं! निराश नहीं होना चाहिए! हमने तो इस पर एक किताब भी लिखी है,”निराशा के कर्तव्य”!

भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को 23 मार्च,1931 को फांसी पर चढ़ाया गया था और इन तीन देशभक्तों ने हंसते-हंसते अपनी शहादत को गले लगाया था ।भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में ही शहीद दिवस हर साल मनाया जाता है। भगत सिंह भारत के आजादी के आंदोलन के ऐसे सिपाही रहे हैं, जिनका ख्याल आते ही शरीर में जोश दौड़ जाता हैं.!

इस मौके पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष सुंदरलाल लोधी, प्रमुख महासचिव वीरपाल सिंह यादव,पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला व राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए!

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