शहीद अजय कुमार की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

शहीद अजय कुमार की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

मेरठ। पुलवामा का आतंकी हमला, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। उस खूनी मंजर को देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। हर दिल में बदले की आग धधक रही है। ऐसे में मेरठ के जाबांज अजय कुमार को साथियों की मौत का बदला लेने का मौका मिला। अजय उस ऑपरेशन का हिस्सा बने, जो पुलवामा अटैक की प्लानिंग करने वाले आतंकियों को ठिकाने लगाने के लिए चलाया गया। अजय ने अपने साथियों का बदला तो ले लिया, लेकिन देश की आन, बान और शान के लिए खुद को कुर्बान भी कर दिया। मेरठ का लाल जब रात को तिरंगे में लिपटकर क्रांतिधरा पर वापस लौटा तो हर किसी की आंखें नम थीं।

शहीद अजय कुमार का आज सुबह 9.30 बजे पतला स्थित आईटीआई कॉलेज के मैदान में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। मेरठ के लाल की अंतिम यात्रा में लगभग चार किलोमीटर लंबा काफिला चल रहा है। सेना, पुलिस, प्रशासन के उच्चाधिकारियों, प्रदेश सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, सांसद, विधायक आदि मौजूद हैं। पुलवामा हमले की प्लानिंग करने वाले आतंकी गाजी की घेराबंदी के लिए जो टीम बनाई गई थी, उसमें अजय को शामिल किया गया। 55 राष्ट्रीय राइफल्स के जांबाज जवान अजय का निशाना अचूक था। इसी कारण अजय को आर्मी की कमांडो टीम के लिए चुना गया था। अजय और उनकी टीम को आतंकियों के खिलाफ चलाए जाने वाले स्पेशल ऑपरेशन के लिए ही भेजा जाता था।

अजय के दोस्त अनिल ने ये भी खुलासा किया कि अजय अभी तक 12 से ज्यादा ऑपरेशन में शामिल रहे थे। बताया कि इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ कि अजय और उनकी टीम को घेर लिया गया था। इसके बावजूद हर बार आतंकियों को मुंह की खानी पड़ी, लेकिन इस बार आतंकियों की गोली अजय का सीना चीर गई।आतंकियों से लोहा लेते हुए अजय देश के लिए शहीद हो गए। शहादत की खबर सबसे पहले सुबह चार बजे जम्मू यूनिट से अजय के बचपन के दोस्त फौजी अनिल को फोन पर दी गई। अनिल को बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान अजय शहीद हो गए। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे तक अनिल इस असमंजस में रहे कि परिवार को ये कैसे बताया जाए। इसके बाद करीब नौ बजे तक परिवार को ये खबर मिली कि अजय अब कभी नहीं लौटेगा।

अजय की पत्नी डिंपल तो यकीन ही नहीं कर पा रहीं थीं कि सात जन्म तक साथ रहने का वादा करने वाला उसका सुहाग साथ छोड़कर जा चुका है। दिनभर परिवार के लोगों की आंखें अजय के इंतजार में जैसे पथरा गई थी। रात करीब 10.30 बजे मेरठ का सपूत तिरंगे में लिपटकर क्रांतिधरा पर लाया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का काफिला रात को ही शहीद के पार्थिव शरीर को मिलिट्री हॉस्पिटल लेकर पहुंचा।

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