खाकी को भी मिले सप्ताहिक अवकाश

गौतम ksp
लखनऊ संवादाता उत्तर प्रदेश कमिश्नरेट की राजधानी खाकी के जीवन में दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास बना सप्ताहिक अवकाश उत्तर प्रदेश में प्रथम विभाग पुलिस का जो की सप्ताहिक अवकाश न होने की मिसाल बन चुका पर चाहे सूबे के मुखिया हो या पुलिस विभाग के मुखिया एवं शासन से प्रशासन तक नहीं दिखता खाकी का दर्द की इनको भी साप्ताहिक अवकाश देना कितना जरूरी है लेकिन यह प्रथा उत्तर प्रदेश पुलिस पर नहीं लागू की जाती क्योंकि किसी को खाकी परिवार का दर्द नहीं दिखता इनका भी परिवार माता-पिता बहू बेटी भाई बहन जैसे और भी परिवारों की कई अहम भूमिका निभानी पड़ती है उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी जिम्मेदारियों निभाते हुए अपने परिवार का सुख दुख के साथी नही बन पाते देखा जा सकता है पुलिस विभाग को छोड़कर हर विभाग में साप्ताहिक अवकाश की प्रथा है चाहे सेंट्रल गवर्नमेंट का कर्मचारी हो या उत्तर प्रदेश सरकार का खाकी को छोड़कर कोई विभाग इतनी जिम्मेदारी से कार्य करने में रुचि नहीं दिखाता जमीनी हकीकत कोई भी देखना नहीं चाहता बस आरोप प्रत्यारोप हमेशा लगा करते हैं खाकी पर उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार ऐसा विभाग है जो किसी को खाकी का दर्द नहीं दिखता सप्ताहिक अवकाश लगभग 4 वर्ष पूर्व एक जिम्मेदार खाकी के अधिकारी ने पहली शुरुआत की कुछ दिन खाकी को अवकाश भी मिला लेकिन सरकार व अधिकारियों के बदलते ही खाकी अवकाश कागजों में रह गया दूसरी सरकार बदलती अधिकारी बदले नहीं मिला तो सिर्फ खाकी को सप्ताहिक अवकाश कहा जा सकता है आजादी के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस को नहीं मिला अवकाश जिस तरह से शासन प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है यह दौर काफी दुखद है पुलिस के प्रति झूठा दिखावा कर वाहवाही लूट रहे जिम्मेदार आखिर कब तक यूं ही चलता रहेगा

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