अयोध्या मामला 26वां दिन: सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से राजीव धवन रखेंगे पक्ष, कोर्ट ने दिए थे सुनवाई समेटने के संकेत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में अयोध्या मामले पर चल रही सुनवाई का आज छब्बीसवां दिन है. कल कोर्ट ने सुनवाई समेटने के संकेत दिए थे. सभी पक्षों से बताने के लिए कहा था कि उन्हें जिरह के लिए और कितना वक्त चाहिए. सभी पक्षों के वकील आज यह जानकारी कोर्ट को दे सकते हैं. आज की सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन जिरह जारी रखेंगे. कल उन्होंने कहा था कि पूरे जन्मस्थान को पूजा की जगह बता कर हिंदू पक्ष मुसलमानों को वहां से बाहर करना चाहता है.

25वें दिन सुनवाई में क्या हुआ?

सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने एक बार फिर जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति की तरह पेश किए जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा, “किसी जगह की परिक्रमा होने के चलते पूरी जगह को पूजास्थल मान लेना गलत है. इस तरह से ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोर्ट मामले में कोई दखल ही न दे सके. पूरी ज़मीन को पूजास्थल बताना, उसे देवता या न्यायिक व्यक्ति साबित करना सही नहीं है. देवता का विभाजन कोर्ट भी नहीं कर सकता. यही कोशिश की जा रही है.”

धवन ने आगे कहा, “मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान है. उसे तो देवता का दर्जा नहीं दिया गया. अयोध्या में पूरी ज़मीन को पूजा की जगह बताने का मकसद दूसरे पक्ष को बाहर कर देना है. अयोध्या में ही 3 जगहों को भगवान राम का जन्मस्थान बताया जाता है. ऐसे में दावे से कुछ भी नहीं कहा जा सकता.”

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने विवादित जगह पर मंदिर होने के दावे का भी खंडन किया. उनका कहना था कि इमारत से जिन खंभों के मिलने का दावा किया जाता है, उनमें हिंदू देवताओं की आकृति नहीं बनी थी. कमल जैसी कुछ आकृतियों के आधार पर उसे मंदिर नहीं कहा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी केस की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर रिपोर्ट

अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती है. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री ऑफिस से रिपोर्ट मांगी है कि अगर अभी आदेश दिया जाए तो कितने दिनों में लाइव स्ट्रीमिंग सेवा की शुरुआत की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस रिपोर्ट के बाद ही लाइव स्ट्रीमिंग पर फैसला लिया जाएगा.

बता दें कि सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग पूर्व बीजेपी नेता गोविंदाचार्य ने की है. उन्होंने याचिका में कहा है कि अगर अयोध्या मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करना संभव नहीं हो तो कम से कम इस सुनवाई की आडियो रिकार्डिंग या लिपि तैयार की जानी चाहिए.

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