कांग्रेस की रफ्तार पर CM योगी आदित्यनाथ ने लगाया ब्रेक

उत्तर प्रदेश में सिमट चुकी कांग्रेस को सोनभद्र के उभ्भा नरसंहार से संजीवनी मिली थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने आंदोलन खड़ा कर विपक्षी तेवर को धार दी और योगी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी, लेकिन दो माह की अवधि में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुनियादी चुनौतियों को दूर कर कांग्रेस की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को सोनभद्र के उभ्भा गांव गए थे। उभ्भा में 281 लाभार्थियों को 852 बीघा जमीन का पट्टा और 292 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित कर योगी ने ग्रामीणों का दिल जीतने की पहल की है। विभिन्न सरकारों में यहां के लोग उपेक्षित रहे हैं। इन पर अनीति और अत्याचार के साथ ही शोषण की शिलाएं बरसती रही हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल कहते हैं ‘मोदी-योगी की सरकार ने आखिरी आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया है, जबकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सत्ता में काबिज रही कांग्रेस ने सिर्फ शोषण किया।’ शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों की सरकारों ने गरीबों की उपेक्षा कर सिर्फ अपना हित साधा। योगी सरकार ने उभ्भा गांव में व्यापक योजनाओं को मूर्त रूप दिया है। सोनभद्र नरसंहार के बाद शुक्रवार को दूसरी बार उभ्भा गांव पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नरसंहार पीडि़तों व उनके परिजनों से मिलते वक्त जहां नरम दिखे वहीं विपक्षी दलों पर आक्रामक रहे। कांग्रेस की महासचिव पर बगैर नाम लिए तंज भी कसे। बोले, कांग्रेस की शहजादी यहां राजनीति कर रही हैं। उनसे पूछता हूं कि जो गरीबों के साथ अन्याय किया गया, उनका हक छीना गया क्या उसके लिए कांग्रेस माफी मांगेगी। आगे उन्होंने हर गरीब को हक दिलाने, सम्मान व सुरक्षा दिलाने का भरोसा देते हुए कहा कि गरीब खुशहाल होगा तो देश खुशहाल होगा।घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए उन्होंने गरीबों के साथ हर कदम पर सरकार के साथ होने व बगैर किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात कही। बोले 2014 में जब मोदी जी ने देश की बागडोर अपने हाथ में ली थी तब एक आह्वान किया था कि सबका साथ सबका विकास। आज उसका परिणाम हम सब देख सकते हैं। हर गरीब के पास अपनी छत है, हर गरीब के पास स्वस्थ रहने, नारी गरिमा सम्मान के लिए अपना शौचालय है।सोनभद्र के उभ्भा गांव में 17 जुलाई को जमीन के विवाद में 11 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद प्रियंका वाड्रा ने उभ्भा के लिए कूच किया, लेकिन उन्हें चुनार के किले में रोक दिया गया। प्रियंका अड़ गई। बाद में उनसे पीड़ितों को मिलवाया गया। इससे एक बार कांग्रेसियों में उत्साह जगा और सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों ने भी सक्रियता दिखाई। इन दलों का प्रतिनिधि मंडल भी उभ्भा गया। प्रियंका की सक्रियता के चलते देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने में विपक्ष को सहयोग मिला। हालांकि जिस जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ था, वह 1952 में कांग्रेसी हुकूमत में बिहार के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने अपने नाम करा लिया था। इसके बाद जमीन पर कब्जे का खेल चलता रहा। किसी सरकार ने सुधि नहीं ली। घटना में ग्राम प्रधान समेत सभी आरोपितों और अफसरों पर कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ने दौरा किया। दूसरी बार के दौरे में मुख्यमंत्री ने उभ्भा पर सौगातों की बारिश कर विपक्ष को चित करने का दांव चल दिया।

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