कैबिनेट की बैठक में उप्र कृषि निर्यात नीति में हुए अहम बदलाव, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कलस्टर में होगी खेती

कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट की बैठक में उप्र कृषि निर्यात नीति-2019 को मंजूरी देने के साथ ही कलस्टर में खेती कराने का अहम निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित नीति अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगी।वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में कृषि निर्यात को दोगुना करने के उद्देश्य से बनाई गई राष्ट्रीय कृषि नीति के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने ‘उप्र कृषि निर्यात नीति-2019’ बनाई है। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि प्रदेश से कृषि निर्यात वर्ष 2024 तक 2524 मिलियन यूएस डॉलर (17,591 करोड़ करोड़ रुपये) के वर्तमान मूल्य से दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बताया गया कि अब 50 से 100 हेक्टेयर व इससे अधिक के कलस्टर बनाकर समूह में कृषि होगी। किसानों के समूहों को प्रोत्साहित किया जायेगा।50 से 100 हेक्टेयर के कलस्टर को 10 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिससे वे अत्याधुनिक उपकरण खरीद सकें और इस योजना को दूसरे किसानों तक ले जाएं। नई प्रोसेसिंग इकाइयों का भी गठन होगा। किसानों को अपने कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत निर्यात करने पर भी प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को उनके कुल टर्नओवर का 10 प्रतिशत अथवा 25 लाख रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी है। यह प्रोत्साहन राशि पांच वर्षों तक दी जाएगी। मैनपावर को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट से जुड़े नए कोर्स शुरू करने के लिए 50 लाख रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने की भी योजना है। सरकार इन नए कोर्स करने वाले छात्रों को फीस में 50 प्रतिशत तक छूट भी दिलाएगी।कैबिनेट ने गुड़ खांडसारी इकाइयों के लिए उप्र कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम-1964 के तहत चीनी वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक के लिए समाधान योजना लागू करने का निर्णय भी लिया। वर्ष 2019, 20, 21 व 2022 के लिए समाधान राशि दस प्रतिशत बढ़ाई गई है। योजना से खांडसारी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सकेगा। बताया गया कि समाधान योजना से सरकार को करीब 49.09 करोड़ रुपये की हानि होगी।उप्र में 23 सहकारी चीनी मिलों को पेराई सत्र 2019-20 के लिए उप्र सहकारी बैंक लिमिटेड व जिला सहकारी बैंकों से 3221.63 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी प्रदान करने के निर्णय को मंजूरी दी गई। चीनी मिलों से गारंटी शुल्क के तौर पर 8.05 करोड़ रुपये लिए जाएंगे।

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