अकीदत और एहतराम के साथ निकला सातवीं मोहर्रम का शाही मेहंदी का जुलूस

लखनऊ। शनिवार रात बड़े इमामबाड़े से सातवीं मोहर्रम पर हज़रत कासिम की शाही मेहँदी का जुलूस निकला गया। हुसैनाबाद ट्रस्ट का शाही मेहँदी का जुलूस अपने तय समय पर रवायती मातमी धुन के साथ निकाला गया।

नौहे के साथ शहनाई की मातमी धुन अजादारों को वह पल याद दिला रही थी। जब हजरत इमाम हसन (अ. स. ) के बेटे हज़रत कासिम (अ स ) का निकाह हज़रत इमाम हुसैन (अ स ) की बेटी से तय हुआ और हज़रत कासिम (अ स ) उसी दौरान करबला की जंग में शहीद हो गए।

पुराने लखनऊ में सात मोहर्रम को हुसैनाबाद के बड़े इमामबाड़े से बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ सातवीं मोहर्रम का शाही मेहंदी का जुलूस निकाला गया। जुलूस बड़े इमामबाड़े से होता हुआ छोटे इमामबाड़े में जा कर समाप्त हुआ। जुलूस में शिया समुदाय के तमाम लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। जुलूस में शिया समुदाय की तमाम औरतों, आदमियों वह बच्चों ने भी बढ चढ़ कर हिस्सा लिया।

सातवीं मोहर्रम के जुलुस को मेहंदी के जुलुस के नाम से जाना जाता है। जुलुस में हाथी और ऊंठ पर बैठ कर शिया समुदाय के छोटे बच्चे और बड़े मर्सियां पढ़ते हुए चलते है। जगह जगह पानी और चाय की सबीलें लगाई जाती है। सबीलों में चाय और पानी के साथ साथ तबर्रुक के भी इंतेज़मात किये जाते है। शिया समुदाय के लोगों ने दूर दूर से आकर जुलूस में बड़ चढ़ कर हिस्सा लिया और नौहा ख्वानी व सीना जनी की। जुलूस में शहर की बड़ी अंजुमन अंजुमने शब्बीरिया ने नौहा ख्वानी व सीना जनी की।

जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से सहूलियत के साथ निकलवाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े इन्तिजाम किये गए थे। जुलूस निकालने के रास्ते मे जगह जगह सीसीटीवी लगे थे। तथा साथ ही सीसीटीवी मोबाईल वैन भी साथ चल रही थी। अग्निशमन दस्ता भी साथ मौजूद था। जुलूस में डी.एम. व एस.डी.एम. ए.एस.पी. विकास चंद्र त्रिपाठी सी.ओ.चौक के साथ साथ कई थाना छेत्रो की पुलिस भी थी। तथा साथ ही आर.ए.एफ. की कई टुकड़ियां भी शामिल थी।

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