अब घर के बजट को बिजली का झटका, बढ़ी दरों से उपभोक्‍ता परेशान

बिजली दरें बढऩे से राजधानी का मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है। पहले स्मार्ट मीटर की बढ़ती गति और फिर बिजली की बढ़ती दरों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। पंद्रह से 25 हजार तक मासिक वेतन पाने वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि इसी पैसे में बच्चों की फीस, किराया, खाना पीना और बिजली का बिल चुकाना होगा। अमूमन अब तक जो बिल आठ सौ से बारह सौ आता था अब बढ़कर यह सोलह से दो हजार रुपये तक होने का अनुमान है।गोमती नगर निवासी पुष्पा मिश्रा कहती है कि बिजली की कीमतों को बढ़ाना गलत है। बिजली, पानी आम आदमी के बजट को देखकर बढ़ाना चाहिए। दिल्ली में बिजली की कीमतें देखें और यूपी में। छोटा घरेलू उपभोक्ता नियमित बिल समय से जमा करता है, बड़ा उपभोक्ता व सरकारी संस्थाओं पर लाखों करोड़ों बकाया है, इनका भार आम पब्लिक पर डालना ठीक नहीं है।मडिय़ांव की भारत नगर निवासी माया सैनी कहती हैं कि बिजली की दरें पांच साल में सिर्फ पांच फीसद बढऩी चाहिए। इससे उपभोक्ता मानसिक रूप से तैयार रहेगा। जब ऊर्जा विभाग में घाटा बढ़ा, जनता पर बोझ डाल दिया। सरकार के पास राजस्व कमाने के लिए कई और स्रोत हैं, लेकिन कर्ज और अन्य जरूरत पूरी करने के लिए जनता को चक्की में पीसा जाता है।

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