कानपुर मे फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में लिपिक का कोर्ट में सरेंडर

शहर में सनसनी फैला देने वाले कलेक्ट्रेट के असलहा अनुभाग में हुए शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े को शासन ने गंभीरता से लिया है। स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) और लखनऊ की संयुक्त की जांच के बाद दूसरे दिन शनिवार को एक लिपिक ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसी लिपिक ने प्रकरण की जांच के दौरान जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था और कई दिनों तक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रहा था।फर्जी असलाह लाइसेेंस जारी किए जाने का पर्दाफाश बीती 31 जुलाई को हुआ था। मामले की जांच के बाद असलाह लाइसेंस पटल के दो लिपिकों से जवाब तलब किया लेकिन दोनों फरार थे। इस दौरान एक लिपिक विनीत ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था, उसके द्वारा फोन किए जाने की जानकारी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उपचार के बाद वह निकल गया था।असलहा विभाग के शस्त्र लिपिक विनीत कुमार तिवारी ने जनपद न्यायाधीश की कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ने पहले अंतरिम राहत दी और बाद में प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। विनीत के पास सरेंडर करने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं था। शुक्रवार को गोपनीय तरीके से विनीत के अधिवक्ता ने सरेंडर अर्जी सीएमएम कोर्ट में दाखिल की थी।इसपर न्यायालय ने कोतवाली पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। शनिवार की सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट आने के बाद विनीत ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट तनु भटनागर ने खारिज कर दी। इसके बाद विनीत को हवालात भेज दिया गया। विनीत के अधिवक्ता शशिकांत शुक्ला और सुधीर मिश्रा ने बताया कि सोमवार को सत्र न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल करेंगे।स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) और लखनऊ की एक अन्य टीम ने शुक्रवार को शस्त्र लाइसेंस अनुभाग में वरिष्ठ लिपिक चंद्रहास सिंह चौहान समेत एक अन्य कर्मी से पूछताछ की और दस्तावेज खंगाले। फर्जीवाड़े के आरोपित लिपिक विनीत तिवारी और प्राइवेट कर्मी जितेंद्र कुमार के बारे में भी जानकारी जुटाई। एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि लाइसेंस से जुड़े तमाम दस्तावेजों का संकलन किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो फोरेंसिक टीम की भी मदद ली जाएगी।कलेक्ट्रेट के एक और कर्मी के फर्जीवाड़े में शामिल होने के अहम सुराग मिले हैं। शुक्रवार को एसआइटी ने उससे कई तरह के सवाल किए। इसकी विनीत और जितेंद्र से गहरी दोस्ती रही है। कई बार यह विनीत की कार से घूमने भी जा चुका है। टीम के मुताबिक दोनों आरोपितों के मोबाइल कॉल डिटेल से शक गहराया है। उक्त कर्मचारी की आरोपितों से कई बार बात हुई है।गलत तरह से जारी हुए शस्त्र लाइसेंसों के धारकों को शुक्रवार को जवाब दाखिल करने के लिए जिलाधिकारी कोर्ट में बुलाया गया था। आठ लोगों ने अपने जवाब दाखिल किए हैं, जिनमें उन्हें 13 सितंबर की तारीख मिली है।

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