सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडे का पारा एस बी एन इंटर कॉलेज पर 8 बच्चों को निकाले जाने के संबंध पर धरना प्रदर्शन शिक्षा का अधिकार अधिनियम ना मानने वाले विद्यालय की मान्यता रद्द हो

 

* सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर संदीप पांडे का पारा SBN इंटर कॉलेज पर धरना 8 बच्चों को निकाले जाने के संबंध में शिक्षा का अधिकार अधिनियम न मानने वाले विद्यालय की मान्यता रद्द हो*

 

ANA न्यूज़ लखनऊ नरपत खेड़ा, पारा स्थित एस.बी.एन. इण्टर कालेज में दो वर्ष पूर्व आठ बच्चों राजन यादव, दीपांशी, राशि, तान्या, अमित, शगुन गुप्ता, सोनम यादव व सोजल यादव का दाखिला शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(ं1)(ग) के तहत हुआ था। तीसरे वर्ष वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विद्यालय सरकार द्वारा बच्चों के शुल्क की प्रतिपूर्ति न हो पाने के कारण बच्चों को आगे पढ़ाने के लिए तैयार नहीं और उन्हें विद्यालय ने निकाल दिया है
उक्त अधिनियम के तहत अब 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए कक्षा आठ तक पढ़ना उनका मौलिक अधिकार बन गया है। अतः बच्चों को बीच में ही निकालना भारतीय संविधान के अंतर्गत उनके मौलिक अधिकार का हनन है। यदि विद्यालय को बच्चों के शुल्क के प्रतिपूर्ति नहीं हो रही है तो यह विद्यालय और सरकार के बीच का मामला है। इसमें बच्चों को दण्डित किए जाने का क्या औचित्य है? विद्यालय को शुल्क प्राप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए न कि बच्चों एवं उनके माता-पिता पर। बच्चों को शिक्षा से वंचित कर एस.बी.एन. इण्टर कालेज ने चूंकि बच्चों के मौलिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है अतः प्रशासन को विद्यालय की मान्यता वापस ले लेनी चाहिए। क्या विद्यालय की हालत इतनी खराब है कि वह कुछ दिनों के लिए मात्र आठ बच्चों के पढ़ाई का खर्च भी वहन नहीं कर सकता? जिस तरह से विभिन्न विद्यालय जिसमें सिटी मांटेसरी स्कूल व सिटी इण्टरनेशनल स्कूल सबसे आगे हैं ने आज से पांच वर्ष पहले से ही शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(ं1)(ग) के तहत दाखिले का आदेश होने के बावजूद बच्चों का दाखिला लेने से मना कर दिया अब शहर के दूसरे विद्यालयों के अंदर भी ऐसी ही मानसिकता घर करती जा रही है। निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने का एक ही तरीका है कि यदि वे सरकारी नियम, कानून का पालन नहीं कर रहे हैं तो उनकी मान्यता वापस लेकर उन्हें बंद कराया जाए अथवा उनका सरकारीकरण कर लिया जाए। पूरा विद्यालय सरकार न लेना चाहे तो कम से कम उनका प्रशासनिक हिस्सा सरकार को अपने हाथ में ले लेना चाहिए धरने के बाद एस.बी.एन. इण्टर कालेज के संस्थापक पटेल तुलसीराम कनौजिया बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरकांत सिंह के फोन पर दिए गए आश्वासन के बाद कि बच्चों के शुल्क की प्रतिपूर्ति करा दी जाएगी, आठों बच्चों को वापस लेने को तैयार हो गए

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