पत्नी और शिष्य की हत्या के बाद सुर्खियों में आए थे चंद्रमोहन महाराज, अब दुष्कर्म के मामले में फंसे

मुजफ्फरनगर जिले की तीर्थनगरी शुक्रताल के आश्रम को परमधाम न्यास का मुख्यालय बनाया था। शुरुआत में नशे के उन्मूलन की मुहिम में युवाओं के साथ काफी संख्या में महिलाएं उनसे जुड़ी थीं।

वक्त के साथ परमधाम न्यास का विस्तार होता चला गया। मेरठ, नोएडा, देहरादून के अलावा कई राज्यों में परमधाम के आश्रम खुलने के साथ उनके अनुयायियों का आंकड़ा लाखों को पार कर गया। वर्ष 2007 में भोपा थाना क्षेत्र में चंद्रमोहन महाराज की पत्नी अंजनी बूड़ाकोटी और शिष्य रिटायर्ड फौजी राम अवतार की हत्या कर दी गई थी।

हमले में चंद्रमोहन महाराज बाल-बाल बच गए थे। चंद्रमोहन का कहना था कि बदमाशों के हमले में उनकी जान गई है। उस समय राम अवतार के बेटे ने चंद्रमोहन महाराज पर हत्या का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी।

लंबी जद्दोजहद के बाद भोपा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी प्रमोद पंवार ने उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। चंद्रमोहन महाराज ने पुलिस की चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि चंद्रमोहन महाराज हत्या के आरोप को सिरे से खारिज करते रहे हैं। दुष्कर्म के मामले में चंद्रमोहन महाराज का नाम आने के बाद शुक्रताल में पत्नी और शिष्य हत्याकांड की याद ताजा हो गई है।

आरोपों को बताया झूठा

दुष्कर्म के मामले में राजपुर पुलिस ने शनिवार को आश्रम पहुंचकर आठ लोगों के बयान दर्ज किए गए। इन लोगों ने चंद्रमोहन महाराज पर लगाए गए आरोपों को झूठा बताया है। उनका कहना था कि चंद्रमोहन महाराज यहां हर बार अपनी पत्नी के साथ आते हैं। महिलाओं का आरोप उनकी समझ से परे हैं।

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