डीजे बजाने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, ध्वनि प्रदूषण होने पर थानेदार होंगे जिम्मेदार

यूपी। ध्वनि प्रदूषण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। D J बजाने की अनुमति देने पर हाईकोर्ट ने पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ध्वनि प्रदूषण हुआ तो संबंधित पुलिस थाना इंचार्ज इसके लिए जवाबदेह होंगे। कोर्ट ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों व हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए ध्वनि प्रदूषण खतरा है।

जस्टिस पी के एस बघेल और जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह फैसला हाशिमपुर, प्रयागराज के निवासी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव व अन्य की याचिका पर सुनाया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी आदेश दिया है कि वो ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत होने वाले अपराध की एफआईआर दर्ज की जाए।

सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश के सभी शहरीय क्षेत्रों को औद्योगिक, व्यवसायिक, रिहायशी या साइलेंस जोन के रूप में श्रेणीबद्ध करें। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी अधिकारियों को आदेश का पालन करने का निर्देश जारी करने को कहा है।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन है। कोर्ट ने सभी डीएम को टीम बनाकर ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने और दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि सभी धार्मिक त्योहारों से पहले डीएम और एसएसपी बैठक कर कानून का पालन सुनिश्चित कराएं। कोर्ट ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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