शहर में गणेश चतुर्थी की तैयारियां शुरू, बप्पा की मूर्तियों को आकार देने लगे कलाकार

लखनऊ। गणेश चतुर्थी को विघ्न विनाशक की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के मौके पर गणेश जी को ज्ञान, सुख-समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में देश की हर कोने में गजानन की मूर्तियां बननी शुरू हो गई हैं. सभी कारीगर भगवान गणेश की सुंदर-सुंदर मूर्तियां बनाने मे जुटे हुए हैं. ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था। इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में गणेश चतुर्थी मनायी जाती है।गणेश चतुर्थी का त्योहार, गणेशोत्सव, अनंत चतुर्दशी के 10 दिनों के बाद समाप्त होता है, जिसे गणेश विसर्जन दिवस के रूप में भी जाना जाता है। अनंत चतुर्दशी पर सभी भक्तजन एक जुलूस निकाल कर भगवान गणेश की मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं। 10 दिन तक चलने वाला गणेश चतुर्थी का यह त्योहार 2 सितंबर को मनाया जाएगा।

बता दें गणेश चतुर्थी के त्योहार को मनाने के लिए देशभर में गणेश भगवान की मूर्तियां बननी शुरू हो गई हैं। गणेश चतुर्थी सबसे ज्यादा हर्षोउल्लास से मुंबई नगरी में मनायी जाती है। ऐसे में मूर्तिकारीगर पूरे जोश के साथ गजानन की मूर्तियों को बनाने में जुट गए हैं। देश हर एक कोने में इन दिनों बस गणेश जी की प्रतिमा नजर आ रही है। ऐसे में लखनऊ से भी कुछ तस्वीरें सामने आईं है, जहां कारीगर गजानन की मूर्ति बनाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में चलिए हम आपको गणपति स्थापना और पूजा का शुभ मुहर्त भी बता देते हैं।

ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्य काल के दौरान हुआ था इसलिए मध्याह्न के दौरान गणेश पूजा को प्राथमिकता दी जाती है। हिंदू समय को ध्यान में रखते हुए, सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच की अवधि को पांच समान भागों में विभाजित किया गया है। इन पांच भागों को प्रथक्काल, संघवा, मध्यमहना, अपर्णा और सयांकल के नाम से जाना जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और गणपति पूजा, दिन के मध्य भाग में की जाती है और वैदिक ज्योतिष के अनुसार गणेश पूजा के लिए यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। मध्याह्न के दौरान, गणेश भक्त विस्तृत अनुष्ठानपूर्ण गणेश पूजा करते हैं, जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा के रूप में जाना जाता है।

गणेश चतुर्थी पूजन विधि-

जानकारी के मुताबिक गणेश चतुर्थी के दिन गजानन को विधिवत वस्त्र और उपनयन से सजा कर उचित आसन देकर विधिवत पूजन कर के स्थापित करते हैं। मध्यान्ह काल में पूरे विधि विधान के साथ गणेश पूजन किया जाता है। इस दिन भक्त पूरे पांडाल को सजाते हैं। श्री गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए उनको गीत और संगीत के माध्यम से भजन का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया जाता है। मंत्रों के मधुर उच्चारण से पूरा माहौल एक दम भक्तिमय हो जाता है। दुर्गा पूजा की तरह यह उत्सव भी 10 दिन तक चलता है फिर अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है।

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