आखिर मेरा क्या कसूर था मेरी मां?

लखनऊ। बच्ची के पैदा होते ही माता-पिता ने उसे झाड़ियो के बीच आवारा जानवरों के शिकार के लिये छोड़ दिया। सोचने वाली बात है कि उस समय उस मां का दिल भी नहीं पिघला। जिसको 9 माह अपनी कोख में रखा और पैदा होते ही छोड़ दिया। ये बच्ची भी कितनी बदनसीब है। सोच रही होगी कि उसको लड़की होने की सजा मिली है।

चाइल्डलाइन लखनऊ को आज सोमवार को थाना प्रभारी ठाकुरगंज द्वारा बाल कल्याण समिति सदस्य सुधा रानी को सूचना दी कि एक बालिका जो आज ही पैदा हुई है। जो जनसामान्य सम्भारी निवासी भगवंत नगर को बसंत विहार कालोनी की झाड़ियो में मिली। सम्भारी द्वारा बताया कि मैं नौकरी पर जा रहा था तभी बसंत विहार के झाड़ियो के बीच रोने की आवाज सुनकर पहुंचे जहां पर देखा कि निर्वस्त्र बच्ची जिसको चीटियां व चीटे नोंच रहे थे।

चाइल्डलाइन टीम सदस्य कृष्ण प्रताप शर्मा, नेहा कश्यप व पुलिस डी.बी. सिंह के सहयोग से रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में बच्ची को दिखाया गया। उन्होंने बच्ची को दो तीन दिन (एसएनसीयू) में भर्ती करने की सलाह दी। परन्तु वंहा पर (एसएनसीयू) की सुविधा न होने के कारण लोकबन्धु संयुक्त चिकित्सालय आशियाना के लिए रेफर किया। लोकबन्धु चिकित्सालय बाल लोक विशेषज्ञ डाॅक्टर पूर्णिमा को पूरी जानकारी दी गयी। डाॅक्टर पूर्णिमा द्वारा हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया गया। जिसके उपरांत बच्ची को हाॅस्पिटल में भर्ती कर लिया गया है। साथ ही उसकी जानकारी बाल न्यायालय (सीडब्लूसी) को दी गयी।

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