अमेरिका के व्हाइट हाउस में पत्रकार के घर पर परिवारीजनों ने किया कब्जा

अमेरिका में रह रहे पत्रकार विनोद घिल्डियाल के मकान पर कब्जा करने के आरोप में गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया गया है।

इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर का कहना है कि पत्रकार के अधिवक्ता की तरफ से दर्ज केस में उनके सगे भाई स्व. हर्षपती घिल्डियाल के परिवारीजनों और एलडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।

इंस्पेक्टर ने बताया कि विनोद घिल्डियाल अप्रवासी भारतीय हैं और सितंबर 2004 से अमेरिका के हार्ट फील्ड्स डाइव सिल्वर स्प्रिंग मेरी लैंड में रह रहे हैं।

पत्रकारपुरम में उनके पास एलडीए का एक मकान है। हर्षपती की मौत हो चुकी है। फिलवक्त मकान में उसके परिवार के सदस्य रह रहे हैं।

विनोद के मुताबिक, उक्त मकान एलडीए ने 10 अक्तूबर 1984 को आवंटित किया था। 1995 में वह व्हाइट हाउस में पत्रकार की हैसियत से अमेरिका चले गए और तबसे वहीं रह रहे हैं। उन्हें अमेरिकी नागरिकता भी हासिल है।

विनोद के मुताबिक, भाई ने 21 जून 2003 को खुद को विनोद घिल्डियाल बताते हुए एलडीए के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी रजिस्ट्री करा ली।

विनोद ने दो अगस्त 2003 को एलडीए में शिकायत की तब कार्रवाई हुई और गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही विनोद व उनकी पत्नी कमला एडवर्ड्स के नाम पर संशोधित रजिस्ट्री कराई गई।

हालांकि, मकान पर कब्जा उनके भाई के परिवारीजनों का ही है। उन्होंने कब्जा दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिए, लेकिन मामला सिफर रहा।

उन्होंने स्व. हर्षपति घिल्डियाल की पत्नी मंजू, बेटे मोहित, बेटी मोहिता, मोनिका व अज्ञात किरायेदार समेत फर्जीवाड़े में शामिल अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

सीएम ने दिए कार्रवाई के आदेश तो एलडीए से गुम हो गई फाइल

विनोद घिल्डियाल ने लखनऊ आकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मकान पर कब्जा दिलाने की प्रार्थना की थी। उनके कागजात देखकर मुख्यमंत्री ने एलडीए उपाध्यक्ष को तत्काल कार्रवाई के आदेश देते हुए एक सितंबर 2019 तक पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी। तीन अगस्त को विनोद एलडीए के अधिकारियों से मिले तो पता चला कि उनके मकान आवंटन से संबंधित फाइल ही गुम हो गई है। विनोद ने रजिस्ट्री व अन्य कागजातों की मूल प्रतिलिपियां एलडीए को दीं, जिसके बाद उनकी फाइल दोबारा तैयार की गई। विनोद का कहना है कि सचिव एमपी सिंह ने मकान पर कब्जा दिलाने में चूक और एलडीए के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की बात कुबूली थी।

आरोपी की हो गई मौत, कोर्ट को गुमराह करते रहे वकील

विनोद ने बताया कि उनके भाई हर्षपति की 30 नवंबर 2018 में मौत हो गई थी। हालांकि, उसके वकील ने 21 जनवरी 2019 और तीन जुलाई 2019 को कोर्ट में आवेदन किया कि उनका मुवक्किल हर्षपति घिल्डियाल शहर से बाहर गया है। इसलिए उसे कोर्ट में हाजिर होने से माफ किया जाए। बकौल विनोद, 25 जुलाई 2019 को वह अपने केस में सीजेएम कोर्ट में बतौर गवाह पेश हुए तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने कोर्ट को भाई की मौत से संबंधित जानकारी व साक्ष्य प्रस्तुत किए।

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