योगी व स्वतंत्र देव दिल्ली में, जल्द हो सकता है मंत्रिपरिषद विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव शुक्रवार की शाम अचानक दिल्ली रवाना हो गए। इनके दिल्ली जाने की खबर के साथ प्रदेश में मंत्रिपरिषद विस्तार की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल पहले से ही दिल्ली में हैं। बंसल को आज लौटना था लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें रोक लिया है।

उधर, भाजपा ने शनिवार को प्रदेश मुख्यालय पर उपचुनाव और संगठनात्मक चुनाव की तैयारियों पर भी बैठक बुलाई है। इन बैठकों में उपचुनाव के लिए बनाए गए प्रभारी बनाए गए मंत्रियों को पूरी रिपोर्ट के साथ बुलाया गया है।

हालांकि भाजपा के उच्चपदस्थ सूत्र योगी और स्वतंत्रदेव के दिल्ली जाने के पीछे संगठनात्मक कारण बताते हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो दिल्ली प्रवास के दौरान मंत्रिपरिषद विस्तार का खाका खींचा गया। योगी व स्वतंत्रदेव ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ मंत्रिपरिषद विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा की।

यह है वजह

प्रदेश में 60 सदस्यीय मंत्रिपरिषद हो सकता है। योगी सरकार ने मार्च 2017 में जब शपथ ली थी तो मुख्यमंत्री सहित 47 सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने शपथ ली थी। इसमें तीन मंत्रियों सत्यदेव पचौरी, डॉ. एस.पी. सिंह बघेल और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने सांसद चुने जाने के कारण त्यागपत्र दे दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जा चुका है।

मंत्रिमंडल में शामिल स्वतंत्र देव सिंह को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल चुकी है। सिंह भी जल्द ही मंत्रिमंडल छोड़ देंगे। ऐसी स्थिति में मंत्रिपरिषद सिर्फ 42 सदस्यीय ही रह जाएगा। फिर अभी तक योगी मंत्रिपरिषद में एक बार भी फेरबदल नहीं हुआ है। साथ ही चार मंत्रियों के हटने से मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय व जातीय असंतुलन भी आ गया है। जिसे ठीक करना है।

संघ और पार्टी नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिपरिषद में कुछ को शामिल करने के साथ कुछ को तरक्की देना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ और भाजपा नेताओं के बीच इस सिलसिले में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित अन्य लोगों ने भी इस सिलसिले में मनन-मंथन पूरा कर लिया है।

कुछ के विभाग बदले जा सकते हैं और कुछ को और महत्वपूर्ण विभाग दिया जा सकता है। एक या दो राज्यमंत्रियों का कद भी बढ़ाए जाने के संकेत हैं।

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