कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा बड़े आंदोलन की तैयारी में

सरकार की वादाखिलाफी से नाराज कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। आंदोलन का स्वरूप और तारीख तय करने के लिए मोर्चा की 16 अगस्त को यहां नगर निगम मुख्यालय पर बैठक बुलाई गई है।

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वीपी मिश्र एवं महामंत्री शशि कुमार मिश्र ने शनिवार को यहां सरकार के रवैये पर क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के साथ कई बैठकों में मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। आश्वस्त किया गया कि निर्धारित समय के भीतर निर्णयों को लागू करा दिया जाएगा। पर, अब तक आश्वासन पूरे नहीं हुए। कई बार मुख्य सचिव के निर्देश के बाद भी अधिकारियों का रवैया नहीं बदला।

क्या करें कर्मचारी

कर्मचारी नेताओं ने बताया कि नियमों की अनदेखी कर स्थानांतरण किए जा रहे हैं। मंत्री या अधिकारी न्यायोचित बातें भी सुनने को तैयार नहीं। उल्टे निलंबित करने की धमकी दे रहे हैं। तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को भी 400 से 500 किमी दूर स्थानांतरित कर दिया गया है।कर्मचारियों ने ये उठाए सवाल

सरकार को इस बात की चिंता ही नहीं है कि कर्मचारियों के बच्चे मध्य सत्र में कहां और कैसे दाखिला लेंगे। उनका परिवार कहां रहेगा? मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि कर्मचारी परिवार का मुखिया होने के नाते उनका कोई दायित्व बनता है या नहीं ? कर्मचारियों को कार्यालय पहुंचने में थोड़े से भी विलंब पर कठोर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन देर तक रोककर काम कराने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

हस्तक्षेप करें मुख्यमंत्री

मिश्र ने दावा किया कि न्यूनतम वेतन देने की नियमावली संभवत: तैयार हो चुकी है। पर, उसे मंत्रिपरिषद में ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कर्मचारी और शिक्षक कब तक उत्पीड़न बर्दाश्त करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री से आग्रह है कि हस्तक्षेप कर न्याय दिलाएं वरना आरपार की लड़ाई को बाध्य होना पड़ेगा। वेतन समिति की रिपोर्ट दो वर्ष से लागू नहीं की गई। स्थानीय निकायों एवं निगमों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं दिया गया। पर, सरकार पूरी तरह चुप्पी साधे है।

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