सफाई के निजीकरण पर नगर निगम कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

लखनऊ। नगर निगम सफाई कर्मचारी के लोगों ने अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के प्रांगण में धरना दिया। उन्होंने मांग करते हुए कहा की उत्तर प्रदेश की स्थानीय निकायों में संविदा व कार्यदाई संस्थाओं के माध्यम से ठेका प्रथा के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों की स्थिति बहुत दयनीय है। कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय निकायों के माध्यम से सफाई का निजीकरकण किए जाने से संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है । उक्त कर्मचारी वार्ड दलित स्वर्णकार समाज के लोग अपनी रोजी-रोटी को लेकर जीने मरने का संकल्प लेकर आंदोलन की राह पर जाने को मजबूर हैं। इस दशा में लखनऊ के कर्मचारी संगठन एक होकर नगर निगम सफाई कर्मचारी संयुक्त मंच के मांग पत्र के जरिए सफाई कार्य निजीकरण के विरोध में निजीकरण को वापस ले जाने का विचार करें और समस्याओं के निस्तारण मंच के प्रतिनिधि मंडल को समय स्वीकृत कर वार्ता के माध्यम से निस्तारण कराया जाए।आप को बता दें कि सफाई कर्मियों की मांग है कि 27 निकायों में निजीकरण व विभिन्न कंपनियों से टेंडर मांगे गए हैं। यह कार्रवाई तत्काल निरस्त किया जाए। संविदा सफाई कर्मचारियों को सरकार की मंशा के अनुरूप नियमित किया जाए। संविदा व ठेका सफाई कर्मियों की एक कमेटी बनाकर नियमावली तैयार कर शीघ्र घोषित करें। ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर ठेके के सफाई कर्मी को दैनिक वेतन भोगी पर मास्टर रोल पर लेकर सीधे इनका भुगतान स्वयं करें। आउटसोर्सिंग पर कार्य कर रहे वाल्मीकि धानुक समाज के सफाई कर्मचारियों को वरीयता के आधार पर शत-प्रतिशत दैनिक वेतन भोगी नियमित पद पर रखा जाए। प्रदेश के निकायों में सेवानिवृत्त व मृत होने से लगभग 52000 नियमित पद रिक्त चल रहे हैं उन्हें नियमित वेतन क्रम से भरा जाए। प्रदेश के निकायों में कार्यवृत्त बीट इंचार्ज या कार्य पर्यवेक्षक पदनाम के स्थान पर मैनुअल के अनुसार उन्हें सहायक सफाई नायक का परिणाम दिया जाए।

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