इंटर की छात्राओं के बदल गए माता-पिता

इंटर की छात्राओं के अंकपत्र में उनके माता-पिता के नाम आपस में बदल दिए गए

विधान परिषद में उठा राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज का मामला

मोहान रोड स्थित राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज की इंटर की छात्राओं के माता-पिता के नाम आपस में बदल गए। दरअसल इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सीबीएसई बोर्ड ने जो अंकपत्र भेजे उनमें उनके माता-पिता के नाम आपस में बदले हुए थे। यह मामला विधान परिषद में उठा तो निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षक से जवाब मांगा। विभाग ने इन सभी छात्राओं के अंकपत्र सुधार केलिए बोर्ड को भेज दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रिजल्ट जारी होने के लगभग दो माह तक विभाग क्या कर रहा था।

राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज समाज कल्याण द्वारा संचालित है। इसमें आश्रम पद्धति से सीबीएसई की पढ़ाई कराई जाती है। इस वर्ष यहां से इंटर की 28 छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी। मगर रिजल्ट में 27 छात्राओं के माता-पिता के नाम गलत लिखे हुए थे। छात्राओं के माता-पिता के नाम आपस में बदले हुए थे। अंकपत्र मिलने के बाद छात्राएं प्रशासन से इसकी शिकायत करना चाहती थीं। सूत्रों की मानें तो विभाग ने इस मामले को दबाना चाहा, लेकिन जानकारी होने पर सदस्य विधान परिषद लीलावती कुशवाहा ने सदन में इस मामले को उठाया, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया। सदन में मामला उठने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक से जवाब मांगा। डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी छात्राओं के अंकपत्र में सुधार के लिए प्रयागराज स्थित सीबीएसई कार्यालय को भेज दिया गया है। उन्होंने निदेशक को इस संबंध में यही लिखित जवाब भी दिया।

दो माह बाद आई सुधार की याद

विभागीय सूत्रों की मानें तो अंकपत्र में गड़बड़ी के मामले को विभाग द्वारा दबाया जा रहा था। कॉलेज में अल्प आय वर्ग की बालिकाएं पढ़ती हैं। उन्होंने इसकी शिकायत करनी चाही लेकिन उन्हें टरका दिया गया। गड़बड़ी का सारा दोष बालिकाओं पर मढ़ते हुए उन्हें ही सुधार कराने के लिए कह दिया गया। डीआईओएस ने निदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि अंकपत्रों को सुधार के लिए बोर्ड कार्यालय 23 जुलाई भेजा जा चुका है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सीबीएसई ने गत दो मई को इंटर बोर्ड का परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उसी माह अंकपत्र भी जारी कर दिया था, लेकिन बालिकाओं को पूरे दो महीने तक अपने अंकपत्र को लेकर परेशान होना पड़ा।

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