590 दिन गुजरने के बाद भी नहीं मिले तारीक के हत्यारे,गोमती नगर का मामला

ANA News

लखनऊ। यूं तो राजधानी पुलिस अपने आप को बहादुर और ताकतवर समझती है, लेकिन खूनी हत्यारों की गर्दन दबोचने में एक बार नहीं, बल्कि कई बार नाकाम साबित हुई। वैसे तो जाल साज ओं से लेकर मकान का ताला तोड़कर चोरी करने वाले गिरोहों को पकड़कर पुलिस अफसर अपने मातहतों तो की पीठ ठोकने में जुटे रहते हैं, लेकिन वहीं मातहत कातिलों को पकड़ने के बजाय पूरी कवायत फाइलों में दफन कर चुप्पी साध लेते हैं।

पुलिसिया कार्रवाई और उनकी लचर कार्यशैली पर गौर करें तो 1 दिसंबर 2017 को गोमती नगर थाना क्षेत्र के ग्वारी गांव के पास बाइक सवार बदमाशों ने उस समय मुन्ना बजरंगी के करीबी तारीख की गोली मारकर हत्या की थी, जब निकाय चुनाव की मतगणना के दौरान राजधानी छावनी में तब्दील थी। हालांकि राजधानी लखनऊ में हुई तारीक हत्याकांड का पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी बाइक सवार बदमाशों ने सरेराह और सरे शाम कई लोगो की जान लेकर पुलिस सुरक्षा को खुली चुनौती दे चुके हैं। पुलिस अफसरों और उनके मातहतों के रफतार और कार्यशैली पर गहन नजर डालें तो खुद-ब-खुद समझ में आ जाएगा की लखनऊ पुलिस कितनी तेज और तर्रार है। इस बाबत जब भी किसी जिम्मेदार पुलिस अधिकारी से सवाल किया गया तो उनका एक ही रटारटाया जवाब मिलता है कि पुलिस टीमें कातिलों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

application/x-httpd-php footer.php ( PHP script text )
%d bloggers like this: