संसद भवन का होगा कायाकल्प, मोदी सरकार ने 333 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया

मोदी सरकार ने संसद भवन के पुनर्विकास, सेंट्रल विस्टा और अन्य संबंधित भवनों के नये कार्य के लिये संसद से 333 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया है. संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश वर्ष 2019-20 की पूरक अनुदान मांगों के दस्तावेज से यह जानकारी प्राप्त हुई. पूरक अनुदान मांगों के दस्तावेज के अनुसार, ‘‘संसद भवन के पुनर्विकास, सेंट्रल विस्टा और अन्य संबंधित भवनों के नये कार्य के लिये संसद से 333 करोड़ रूपये आवंटन की संसद से मंजूरी मांगी गई है.’’ उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार इन भवनों का पुनर्विकास करना चाहती है.

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में फिक्की के एक कार्यक्रम में कहा था कि संसद भवन और सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की सरकार की मेगा योजना और विभिन्न मंत्रालयों के लिए एक समग्र परिसर का निर्माण कार्य पर कदम बढ़ा रही है. इसके तहत संसद भवन के आसपास बने अलग-अलग भवनों के पुनर्विकास की भी योजना है. बता दें कि भारतीय संसद का निर्माण 1927 में हुआ था जिसके अब 92 वर्ष पूरे हो चुके हैं. ऐसे में आने वाले समय में जन प्रतिनिधियों की संख्या और कामकाज में सुविधा और इसके पुरातात्विक चरित्र को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों से नये भवन के निर्माण की मांग की जा रही थी.

संसद भवन के पुनर्विकास का विषय उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उठाया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसके बाद एक समारोह में कहा था कि कि संसद के लिए नए भवन सहित वर्तमान संसद भवन को नया स्वरूप प्रदान करने की राज्यसभा के सभापति, लोकसभा स्पीकर और सांसदों सहित विभिन्न वर्गों की मांग पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. पीएम मोदी ने कहा था, ‘सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है. संसद भवन का अच्छी तरह से उपयोग किया जाए या कोई और भवन बनाने की जरूरत है, अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल पूरा होने तक यह कार्य करना चाहिए.

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